Katrana Mat / कतराना मत। #Poem
भले ही मैंने हजारों बार बोली है ये बात पर आज फिर से दोहराउगा की कतराना मत। भले ही हमारी लड़ाई हो जाए भले ही हमारी बाते बंद हो जाए पर जब अपने आपको अकेला मेहसूस करो तो मुझे कॉल लगाने से कतराना मत। मुझे दातने से कतराना मत, अपनी बाते बताने से कतराना मत, दुखी हो तो मुझसे अपने आसू छुपाना मत डर लगे तो मेरा हाथ पकड़ने से कतराना मत। जब मिलु तो गले लगने से कतराना मत, प्यार आए तो जताने से कतराना मत, खुश हो तो ये मुस्कान छुपाना मत शर्मा गई हो तो अपनी नजरे झुकना मत अपने हाथो से मुझे खाना खिलाने से कतराना मत अपनी बाहों में मुझे भरने से कतराना मत अपने दिल का हर हाल बताने से कतराना मत मेरी ज़िंदगी सिर्फ तू है इसलिए मुझे छोड़ के जाना मत बस मेरे सामने क तराना मत, बस कतराना मत।