Love with a cheater - Hindi | Based on a real story


आ बैठ तुझे एक कहानी सुनाती हुं ।
मेरे पहले प्यार की दस्ता बताती हुं ।
बात है उस प्यार के महीने की,
जिस ठंड में गर्मियों का इंतजार करती थी।।

एक नए लड़के ने दरवाजे पर दस्तक दी।
भैया में पूछा कोन हो भाई?
बोला नया सा लड़का हूं ,
किस्मत से आपके क्लास आ पहुंचा हूं ।।

बड़ा नया सा लड़का था।
सबसे मुस्कुराके बाते करता था।
पर में तो उसकी आखों पर फिदा हो गई,
न जाने क्यू उसकी मुस्कान मेरे दिल को छू गई।।

पहली मुलाकात हमारी बड़ी अजीब सी थी।
मुझे देखकर दर गया और बोला आप कोन बहनजी ।
बाते की तो पता चला ये तो दूर का रिश्तेदार है,
पर इससे दूर न जाने की तो दिल ने इच्छा की।

उसकी आखों ने तो दिल लूट ही लिया था।
उसकी मुस्कान तो कहर ढा रही थी।
पता नही बाते करते करते,
मैं कब उसके इतने करीब आ गई।।

मेरे लिए तो मानो सपना सा लगता था।
ये बंदा सबको भूलकर सिर्फ मेरी आखों को ही देखता रहता था।
हमारी क्लासेस तो खत्म हो जाती थी बहुत पहले से,
पर उसकी बातो में क्या जादू था, रोक लेती थी, हर बार जाने से।

एक खाली कमरा जिसमे सिर्फ वो और मैं,
बैठे रहते थे अपने किस्सों के साथ।
बाते तो ख़तम होती नही थी,
पर हाथ दुंड लेते थे, एक दूसरे का साथ।।

वो मेरी आखों में और मैं उसकी आखों में,
पता नही कितने घंटो तक डूबी रहती थी।
क्या बतायु यार प्यार में उसको,
अपने सपनो में डुंडा करती थी।

मां नही थी उसकी,
इसलिए मुझे मां समझ बैठा था।
जभी भूख लगे तो मुझे बुला लिए करता था।
मैं भी भागी भागी जाऊ उसके पुकार पर,
उसके लिए वही बनाती थी, जो उसे अच्छा लगता है।

मेहनत तो थी, ये सब करने में,
पर अच्छा लगता था।
कोई ऐसा मिला था जो ,
अनजान होके भी अपना लगता था।

ऐसे नही है की उसने मेरा खयाल नही रखा। (x2 times)

मेरे होटों पर अगर कुछ लग जाए ,
तो अपने शर्ट की बाजुए खोल कर साफ करता था।
मेरे दिल में बस यही बात चलती थी,
कितना क्यूट है ये, बस यही खयाल चलती थी ।

हर बार मुझे घर बुलाए,
कहता की चल तुझे पापा से मिलाए ।
पर डरता इतना थी की,
पैंट गीली कर दे अगर एक बार डाट खाए।

मेरा बंदा जरा अलग सा था।
मेरे से लड़ता भी था और दूसरी को मरता भी था।
पर उसको सुकून मेरे कंधे पर ,
सर रख कर सोने में ही आता था।

में तो उसकी दीवानी हो गई थी,
वो जो बोले हर बात दिल से लेती थी।
वो भी बड़ा सच्चा सा लगता था,
मेरी हर बात को नोटिस कर लेता था।

मेरा रोना उससे देखा नही जाता था।
हर बार मुझे मनाने चला आता था।
में भी सायद उसके मनाने का इंतजार करती थी।
उसकी बाहों मै मुझे भी सुकून मिलती थी।।

मुझे अपना हर राज बताता था।
अपना बैंक का पासवर्ड तक, मुझसे नही छुपाता था।
इतना प्यारा सा लगता था।
लब्ज़ होते तो और कहती की परवाना सा लगता था।

खैर काश ये सब सच्चा होता।
सच तो था, पर काश मेरा होता।
ये सारी यादे आज, घुटन सी लगती है।
आशुए नही बची, आंखे आज भी कहती है

मैं तो उसे अपने पापा की, आखिर निशानी देना चाहती थी।
उसको हमेशा के लिए, अपनी बाहों में समेटकर रखना चाहती थी।
पर किस्मत ने भी क्या खेल खेले हैं।
आशु और दुख के बादल मेरे ही आसमान को घेरे हैं।।

मैंने देख लिए उसे, किसी और की बाहों में लिपटे हुए।
ये मंजर देख मेरी आवाज भी, गुम हो गई सीने में।
मैं तो उसे, अपनी बाहों में छुपाना चाहती थी।
पर उसे तो नींद, किसी और की बाहों में आती थी।

फिर क्या था, आशुयो का सागर बह गया
और उस सागर में, मैं डूबती चली गई।
न छोर मिला न किनारे पे कोई हाथ थामने वाला
लगा अब मौत ही बाकी है, पर मौत भी साथ छोड़ दि

लड़के आए गए मेरी जिंदगी से पर,
में आज भी उसे भुला न पाई।
उसने इस दिल को कदर तोड़ा है कि,
में इसे आज भी इसे जोर न पाई।

~ अभिजीत यादव 

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